मेरा सब बुरा बांटना,
और अच्छा भी बांटना।
मैं जब भी जाऊं इस दुनिया से,
मेरी दास्तान भी सुनाना।
बताना… कैसे मैं हंसा देता था,
ऐसे ही किसी बात पर।
बताना… कैसे मैं पकड़ा था,
हाथ ऐसे ही किसी राह पर।
बताना कि मैं बुरा भी बहुत था,
अक्सर करता तो सब को परेशान भी।
रुला देता था हंसाते हंसाते,
और छोड़ देता था बीच में साथ भी।
कहता था सबको लड़ो अकेले,
हर वक्त होगा कोई साथ नहीं।
सिखाता था एक कदम और चलो,
डरने की कोई बात नहीं।
सुनाना सबको मेरी कहानियां,
एक मनमौजी इंसान की।
खेलता-कूदता, हंसता-हंसाता,
अय्याशी अय्याश की।
आंखें जिसकी काली थी,
कल थोड़ा था छोटा।
बातें सारी बड़ी-बड़ी,
हर जग में साथ होता।
पढ़ने में कुछ खास नहीं,
रिश्तो का जिसको नाप नहीं।
रहता खड़ा अकेला एक,
और जब देता कोई साथ नहीं।
हां स्वार्थी भी था वह,
लिखता साक्षर खुद पर।
हर्ष था नाम उसका,
लिख रहा है आज फिर खुद पर।
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Harsh Pratap Singh writes beautiful Hindi Poetry.
“I believe in keep smiling.. smiles make everything perfect.”
You can find him on Facebook
Email- singhharshpratap3561@gmail.com
One response to “मुझे याद रखना।”
Bahut sundar rachna! 👌
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