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हल्के सांवले रंग की लड़की

हवाएं आज अपनी रफ़्तार से कुछ ज्यादा तेज थीं

थोड़ी धूल भी थी जिससे मौसम सांवला हो रहा था

याद आ गयी एक लड़की हल्की सांवले रंग की

आंधी में जिस तरह पेड़ों के पत्ते बलखा रहे थे

लग रहा था मानो वो हेयर ड्रायर से अपने बाल सुखा रही हो

या वो अपनी स्कूटी पर बिना स्कार्फ बांधे जा रही हो

हवाओं की सरसराहट और पत्तों की खनखनाहट मानो

वो मुझे अपने शहद भरे मीठे लहजे में डांट रही हो

क्या कर रहे हो इस आंधी में घर से बाहर ??

हवाएं मुझे धकेल रहीं थी या अहसास दिला रही थी

उसके होने का , उसकी छुवन महसूस हो रही थी मुझे

मैं उसके ख़्याल में ठहर सा गया था कि एक झोंका 

बहुत जोरों से आया वो मुझे घर जाने के लिए डांट रही हो जैसे।।

मेरे बालों में उसकी कोमल उंगलियों महसूस हो रही थी

मानो मैं वहीं सो जाने वाला था ,,, 

मगर ये क्या बारिश होने लगी मिरी आंखों से …..

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Hi! I’m Vishal. I’m a writer who loves to write everything comes in my mind whether in form of namz, ghazal, poem, short stories.

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